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नेशन बुलेटिन धार।शहर को साफ पानी दिलाने निकले कांग्रेसी, जवाब में दर्ज हुआ मामला।

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धार। शहर में पिछले एक सप्ताह से गंदे, मटमैले और बदबूदार पानी की आपूर्ति को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को जिला युवा कांग्रेस अध्यक्ष रोहित कामदार के नेतृत्व में युवा कांग्रेस और शहर कांग्रेस ने नगर पालिका कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बंटी डोड, टोनी छाबड़ा, कृष्णा पंवार, परितोष राठौर, हेमराज सुजान, गणेश खेर, सिद्धार्थ भूरिया, जितेन्द्र चौहान, वाकिफ मोहम्मद, सुनील चौहान, मोहन डामोर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।

महिला कार्यकर्ताओं ने सिर पर मटके रखकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि युवक गंदे और बदबूदार पानी से भरी बोतलें लेकर नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर मटके फोड़े और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शहरवासियों को पांच से छह दिन के अंतराल में पानी मिल रहा है और वह भी केवल कुछ मिनटों के लिए। नलों से आने वाला पानी पीले रंग का, बदबूदार और कीचड़युक्त है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

इस पूरे आंदोलन के दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेता नदारद रहे। जो नेता अक्सर विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी करते दिखाई देते हैं, वे शहर के इस महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे पर कहीं नजर नहीं आए। हालांकि पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुजीब कुरैशी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी राधेश्याम मुवेल आंदोलन में मौजूद रहे और कार्यकर्ताओं के साथ खड़े दिखाई दिए। उनकी मौजूदगी और अन्य बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही।

इधर प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद नगर पालिका परिषद धार के मुख्य नगर पालिका अधिकारी की शिकायत पर थाना कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अपराध क्रमांक 338/2026 दर्ज कर लिया। पुलिस ने रोहित कामदार, कृष्णा पंवार, परितोष राठौर, बंटी डोड, टोनी छाबड़ा, हेमराज सुजान, गणेश खेर, सिद्धार्थ भूरिया, जितेन्द्र चौहान, वाकिफ मोहम्मद, सुनील चौहान और मोहन डामोर सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं एवं लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल उठ रहा है कि शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं पर ही पुलिस मामला दर्ज हो गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन जनता को गंदे और बदबूदार पानी से राहत दिलाने के लिए था, जबकि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान देने के बजाय पुलिस कार्रवाई का रास्ता चुना।

फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर जांच कर रही है तथा अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। वहीं शहर में पेयजल संकट और आंदोलन के बाद दर्ज हुई एफआईआर दोनों ही मुद्दे चर्चा के केंद्र में बने हुए ।

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