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धार, देवशयनी एकादशी कल 6 जुलाई को मनाई जाएगी ,(डॉ. अशोक शास्त्री)

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देवशयनी एकादशी कल 6 जुलाई को मनाई जाएगी , देवशयनी पर वर्षों बाद ग्रहों का अद्भुत संयोग , एकादशी के बाद गुरु और शनि, बुध ये ग्रह बदल रहे अपनी चाल, चातुर्मास में चार महीनों के लिए सभी शुभ कार्य बंद
इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में तथा भागवत पुराण के हिसाब से पाताल लोक में शयन करते हैं।( डॉ. अशोक शास्त्री )
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे ‘हरिशयनी एकादशी’, ‘पद्मा एकादशी’ और ‘आषाढ़ी एकादशी’ भी कहा जाता है। इसी दिन से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। यह समय चातुर्मास का प्रारंभ होता है, जो चार महीनों तक चलता है। देवशयनी एकादशी का व्रत कल जुलाई को रखा जाएगा।
इस संदर्भ में मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन से भगवान विष्णु क्षीर सागर में तथा भागवत पुराण के हिसाब से पाताल लोक में शयन करते हैं और फिर प्रबोधिनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) को जागते हैं। इन चार महीनों को देवताओं का विश्राम काल कहा जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञादि मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
डॉ. अशोक शास्त्री के मुताबिक़ देवशयनी एकादशी पर अबकी बार ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है। देवशयनी एकादशी कल 6 जुलाई रविवार को है। देवशयनी एकादशी पर अबकी बार सालों बाद गुरु आदित्‍य योग का अद्गभुत संयोग बन रहा है। मिथुन राशि में गुरु और सूर्य की युति से गुरुआदित्‍य योग बन रहा है। देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्‍णु 4 महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। अबकी बार गुरुआदित्‍य योग जैसा धनदायक योग होने पर विभिन्न राशियों के लोगों को बहुत लाभ होगा । देवशयनी एकादशी पर ग्रहों के एक साथ कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इसके अलावा देवशयनी एकादशी पर शुभ योग, साध्‍य योग, त्रिपुष्‍कर योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है।
डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि देवशयनी एकादशी के बाद से ग्रहों में बड़ा फेरबदल होने वाला है। दरअसल दे‌वशयनी एकादशी के बाद से 9 जुलाई 2025 से 13 जुलाई 2025 तक दो बड़े ग्रह शनि और गुरु की चाल में बदलाव हो रहा है। गुरु जो अस्त हो गए थे, अब 9 जुलाई को उदय होंगे, इसके अलावा शनि जो अभी मीन राशि में मार्गी है, वो अब वक्री होंगे। शनि करीब नवंबर तक वक्री रहेंगे। इसके बाद सूर्य कर्क राशि में जाएंगे। इसके बाद सूर्य का दक्षिणायन काल शुरू हो जाएगा। वहीं 18 जुलाई को बुध भी वक्री हो जाएंगे। इस प्रकार कई ग्रहों में हलचल देवशयनी एकादशी के बाद ही होगी।

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