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नेशन बुलेटिन धार। आदिवासी समाज के पारंपरिक अभिवादन ‘जोहार’ पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ ACS ने सौंपा ज्ञापन, दोषी पुलिस निरीक्षक के निलंबन की मांग।

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धार। आदिवासी छात्र संगठन (ACS), मध्य प्रदेश ने भोपाल के एक पुलिस निरीक्षक द्वारा आदिवासी समाज के पारंपरिक अभिवादन ‘जोहार’ पर की गई अभद्र टिप्पणी और सार्वजनिक अपमान के खिलाफ धार जिला पुलिस अधीक्षक मुख्यालय पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महोदय माननीय विजय डावर को माननीय पुलिस कमिश्नर महोदय के नाम ज्ञापन सौपा* *संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महेश डामोर के नेतृत्व में आज माननीय पुलिस कमिश्नर, भोपाल को एक विस्तृत कानूनी ज्ञापन सौंपकर दोषी अधिकारी के खिलाफ SC/ST एट्रोसिटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत तत्काल FIR दर्ज करने और निलंबन की माँग की गई है।*

*अस्मिता और संस्कृति पर आघात बर्दाश्त नही किया जायेगा।*

 

कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महेश डामोर ने कहा, “‘जोहार’ शब्द केवल एक अभिवादन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के सह-अस्तित्व तथा हमारी विशिष्ट संस्कृति का प्रतीक है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत संरक्षण प्राप्त है। कानून के रक्षक (पुलिस निरीक्षक) द्वारा सार्वजनिक रूप से ऐसी जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी करना बेहद क्षोभजनक है। इससे पूरे प्रदेश के आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना है।”

 

• गंभीर कानूनी उल्लंघन: संगठन ने स्पष्ट किया है कि पुलिस अधिकारी का यह कृत्य SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196, 299 और 352 के तहत एक गंभीर संज्ञेय (Cognizable) अपराध है।

• तत्काल निलंबन की माँग: निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने के लिए दोषी पुलिस निरीक्षक को तुरंत पद से निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जाँच शुरू की जाए।

• समयबद्ध उच्चस्तरीय जाँच: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में समय-सीमा (Time-bound) के भीतर निष्पक्ष जाँच हो।

• पुलिस विभाग का संवेदीकरण: भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुलिस विभाग के समस्त कर्मचारियों को वंचित व आदिवासी वर्गों की संस्कृति के प्रति संवेदनशील बनाने हेतु विशेष निर्देश जारी किए जाएँ।

लोकतांत्रिक तरीके से न्याय की लड़ाई रहेगी जारी

आदिवासी छात्र संगठन (ACS) ने साफ तौर पर कहा है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत विद्वेष से नहीं, बल्कि विधि के शासन (Rule of Law) और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए है। संगठन पूर्णतः लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से न्याय की माँग के लिए प्रतिबद्ध है। ACS ने उम्मीद जताई है कि भोपाल पुलिस कमिश्नर इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर त्वरित और न्यायसंगत कानूनी कार्रवाई करेंगे।

ज्ञापन के दौरान धार जिला अध्यक्ष रोहित बडुकिया,जिला उपाध्यक्ष विश्व विजय जामोद,जिला मिडिया प्रभारी भारत कलारे ,अर्जुन ताड , आयुष ग्रेवाल, अजित मोहरे ,विजय वसुनिया, सुमित सिंघाड़ ,राहुल डावर, रवि वसुनिया, अनिल एवं अन्य साथी गण उपस्थित रहे।

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