धार 13 जुलाई 2026।* किसी भी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की सहायता हेतु संचालित है वन स्टॉप सेंटर (सखी) कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना के निर्देशन एवं जिला कार्यकम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्री रामनिवास बुधौलिया के मार्गदर्शन में संचालित वन स्टॉप सेंटर (सखी) जो कि किसी हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को सहायता प्रदान करने हेतु वर्ष 2018 से जिला धार में संचालित है।
प्रशासक श्रीमती ज्योत्सनासिंह ठाकुर ने बताया कि एक प्रकरण में प्रार्थिया के पति द्वारा अन्य महिला से संबंध होने के कारण प्रार्थिया को पति द्वारा शारिरिक एवं मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। आपसी विवाद होने से प्रार्थिया अपनी बेटी को लेकर अपने मायके चली गई थी। सी.एम हेल्प लाईन पर शिकायत करने के बाद प्रार्थिया को वन स्टॉप सेंटर (सखी) पर बुलवाया गया प्रार्थिया द्वारा शिकायत की गई। वह पति के साथ रहना चाहती है, परन्तु पति को बुलवाकर समझाईश चाहती थी। वह उनकी बेटी के लिए भी कुछ भी जरूरत का समान और घर की जिम्मेदारी नही उठाता था। विपक्षी को बुलवाया गया और दोनों की पक्षों की काउंसलिंग की गई। जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी और दोनों ही पक्षों को ऐहसास हुआ की छोटी-छोटी गलती है और गलत फहमी है जिसके चलते मन मुटाव की स्थिति बनी है। दोनों पक्षों ने अपने परिवार के भविष्य को ध्यान में रखकर आपसी सामजस्य व प्यार के साथ आगे बढने का निर्णय लिया और प्रार्थिया के पति द्वारा बोला गया की वह अन्य महिला से कोई रिश्ता नही रखेगा। और अपने परिवार के साथ अच्छे से रहेगा दोनों परिवार खुशी-खुशी घर लौटे।
इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में प्रार्थिया ने बताया कि उनके विवाह को लगभग 31 वर्ष हो चुके है उनके दो बेटे है। उनकी भी शादी हो गई है पति द्वारा आये दिन शराब पीकर लड़ाई-झगड़ा मारपीट करता हैं और घर से निकाल देता है। प्रार्थिया पति के साथ रहना चाहती है प्रार्थिया के आवेदन पर उनके पति को बुलवाया गया। दोनो पक्षों की काउंसलिंग की गई समझाया गया कि विपक्षी शराब छोड दे शराब की वजह से परिवार में झगड़ा होता है। वह अपनी आदत छोडेगे तो पुरा परिवार इससे प्रभावित होगा। समझाईश के बाद विपक्षी ने आशवासन दिया की अब वह शराब नही पीयेगे अपनी पत्नी को प्यार व सम्मान के साथ रखेगे। मारपीट नही करेगें। और दोनों साथ में खुशी-खुशी से घर लौटे।
इसके अलावा एक और प्रकरण में प्रार्थिया ने बताया कि उनके विवाह को लगभग 9 माह ही हुए है, उनकी दुसरी शादी है, और पहले पति की एक छोटी बेटी है, जो कि प्रार्थिया के साथ है और प्रार्थिया ने बताया कि दुसरी शादी की है। वहा पर उनकी बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी उनके पति द्वारा ली गई थी। परन्तु पति द्वारा शादी हुई तब से भी गाली गलौज एवं मारपीट की जाती है और बेटी के साथ भी अच्छा व्यवहार नही किया जाता है। प्रार्थिया पति के साथ रहना चाहती है प्रार्थिया के आवेदन पर दोनों पक्षों को बुलवाकर उनकी काउंसलिंग की गई समझाया गया। प्रार्थिया गर्भवती है। उनका ईलाज करवाने के लिए बोला गया और उनकी बेटी के साथ अच्छा व्यवहार करें। और अच्छी परवरिश करें। विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया की वह पत्नी और उनकी बेटी की पुरी जिम्मेदारी उठायेगें। प्रार्थिया का ईलाज करवायेगें। दोनों पक्षों की आपसी सहमती से समझौता हो गया। दोनों साथ में अच्छे से रहेगें और उनकी बेटी को लाड़ प्यार से रखगें। दोनों साथ में अपने घर लौटे।
इस प्रकरण में प्रार्थिया अपने घर से निकल गई थी और भटक गई थी। जिस कारण गांव के एक व्यक्ति द्वारा प्रार्थिया को देखकर 112 पर सूचना दी। जिससे 112 वहा पर पहुँची और प्रार्थिया अपने घर का पता सही नही बता पाने के करण प्रार्थिया को वन स्टॉप सेंटर आये क्योकि प्रार्थिया के पास रूकने के लिये कोई सुरक्षित स्थान नही था। प्रार्थिया से प्रशासक द्वारा बात की गई और वन स्टॉप सेंटर अस्थाई आश्रय दिया गया। उस दिन प्रार्थिया ज्यादा परेशान थी और कुछ भी बताने में असमर्थ थी उसे कुछ भी याद नही आ रहा था। दो तीन दिन में उसकी स्थिति सामान्य हुई और प्रार्थिया की काउंसलिंग की गई। फिर प्रार्थिया द्वारा अपने मायके का पता और भाई-भाभी व परिवार का नाम बताया गया। प्रार्थिया को वन स्टॉप सेंटर से लेकर उनके मायके पता करते हुए पहुँचे वहा पर प्रार्थिया के दो भाई और भाभी और परिवार घर पर मिले। उनसे बात कर जानकारी ली गई और प्रार्थिया द्वारा भी अपने भाई-भाभी व परिवार को पहचान लिया गया फिर प्रार्थिया को उनके परिवार में सुरक्षित छोडा गया। जिससे प्रार्थिया फिर से अपने परिवार पूर्नवासित हो सके।

वन स्टॉप सेंटर के खुलने से महिलाओं को घर जैसा आश्रय मिल गया है। और भटकी हुई महिलाओं को उनके घर तक सुरक्षित तरीके से भेजी जा रही है। इसमें वन स्टॉप सेंटर व सभी सेंटर बहुत मददगार है। वन स्टॉप के सभी कर्मचारियों ने उपस्थित होकर पूर्ण सहयोग किया गया। केस वर्कर श्रीमती लीला रावत केस वर्कर सरिता चौहान एवं महिला आरक्षक संतोषी कटारे और श्रीमती निर्मला बामनिया एवं समस्त स्टॉप द्वारा सहयोग प्रदान किया गया।









