यदि मंदिर में वर्तमान में भौतिक रूप से मूर्ति नहीं है तो भी वह मंदिर ही रहेगा।
*भोजशाला पर प्लेसेस आफ वरशिप एक्ट लागू नहीं होता है*
*भोजशाला वफ़क़ संपत्ति नहीं है।
*मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के जवाब में ही है, भोजशाला के मंदिर होने के कई प्रमाण।
इंदौर /धार।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा मई 2022 में उच्च न्यायालय इंदौर में दायर याचिका 10497/ 2022 में आज उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति श्री विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति श्री आलोक अवस्थी जी की डबल बेंच में भोजशाला मामले को लेकर लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई।
सनातनी योद्धा और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विष्णुशंकरजी जैन ने हिंदू पक्ष के समर्थन में कई साक्ष्य रखें और सप्रमाण बहस करी।
श्री जैन ने कहा कि मूर्ति के अपने अधिकार रहते हैं, श्री राम मंदिर निर्णय में भी मूर्ति को अधिकार मिले हैं।
हिंदू धर्म में प्राण प्रतिष्ठा होने पर वह स्थान हमेशा मंदिर ही कहलाता है।
भगवान के स्थल के चरित्र को बदला नहीं जा सकता।
आक्रमण,अतिक्रमण और आतंक से यदि मंदिर के स्थान को ध्वस्त करने का प्रयास भी किया गया तो भी वह मंदिर ही रहता है।
श्री जैन ने अपने तर्कों में श्री राम जन्मभूमि और श्री कृष्ण जन्म भूमि के फैसलों के कई उदाहरण रखें।
वक़्फ़ एक्ट 2025 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए श्री जैन ने बताया कि भोजशाला वक़्फ़ संपत्ति हो ही नहीं सकती। क्षेत्र 3D के अंतर्गत यह एक्ट भी भोजशाला पर लागू नहीं होता है।
प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 को लेकर भ्रम भ्रांतियां फैलाई जा रही है। धारा 4(3)(1 )के अनुसार यह एक्ट भी भोजशाला पर लागू नहीं होता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षित स्मारकों पर यह एक्ट लागू नहीं होता है।
श्री जैन ने न्यायालय को बताया कि याचिका के प्रतिवादी क्रमांक 8 मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने अपने जवाब में यह माना है कि भोजशाला संस्कृत विद्यालय रहा है।यह परमार कालीन स्मारक है और यहां राजा भोज राज करते थे। इस जवाब में कई संस्कृत शिलालेख मिलने का भी उल्लेख है।
मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अपने जवाब में यह भी स्वीकार किया गया है कि 1305 में खिलजी ने धार मालवा पर आक्रमण किया और परमार काल 1000 सन और 1100 सन में रहा।
इससे यह स्पष्ट होता है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने मंदिर को ध्वस्त करके मस्जिद में परिवर्तित करने का असफल प्रयास किया। हमें भोजशाला में पूजा का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
सुनवाई के दौरान श्री जैन ने गंगा नदी, नर्मदा नदी, गोवर्धन पर्वत इनकी पूजा के भी उदाहरण दिए कि यह भौतिक स्वरूप में नहीं है तो भी निरंतर पूजनीय है।
भोजशाला में माँ वाग्देवी पवित्र रूप से विराजमान है।
हम केवल आस्था के आधार पर बात नहीं कर रहे हैं,हम रिसर्च के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं.
दिनांक 9 अप्रैल गुरुवार को भी दोपहर 2:30 बजे सुनवाई जारी रहेगी जिसमें श्री विष्णु शंकर जैन भोजशाला के पक्ष में अपने तर्क रखेंगे।
*सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विनय जोशी,पार्थ यादव,मनी मुंजाल,सौरभ सिंह और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहे।









