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नेशन बुलेटिन धार। 15 सितंबर के वराह मार्च को लेकर प्रशासन और हिंदू संगठनों में टकराव के आसार, अनुमति निरस्त होने पर सनातन प्रहरी ने जताई नाराजगी।

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धार। शहर में आगामी 15 सितंबर को प्रस्तावित वराह मार्च को लेकर प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। प्रशासन द्वारा यात्रा की अनुमति निरस्त किए जाने के बाद सनातन प्रहरी संगठन ने इसका विरोध किया है। संगठन के अंशुल शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने वराह यात्रा के लिए प्रशासन से किसी प्रकार की अनुमति मांगी ही नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने की बात कही जा रही है।

अंशुल शर्मा ने कहा कि वराह यात्रा 15 सितंबर को हर हाल में निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि यात्रा को लेकर संगठन अपनी तैयारियां कर रहा है और इसके लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग वराह मार्च में शामिल होंगे।

‘परिणाम भुगतने के लिए तैयार’

अंशुल शर्मा ने कहा कि वराह यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से निकाली जाएगी और संगठन किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से यात्रा को रोकने का प्रयास किया जाता है तो संगठन इसके परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार है।

उन्होंने प्रशासन द्वारा शहर में लगातार फ्लैग मार्च निकाले जाने पर भी सवाल उठाए। अंशुल शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन को बार-बार फ्लैग मार्च निकालकर आम जनता के बीच भय का वातावरण नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से निकलने देना चाहिए।

मंदिर जाने के लिए अनुमति क्यों?

अंशुल शर्मा ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मंदिर में जाने के लिए किसी प्रकार की अनुमति लेना क्यों आवश्यक है। उन्होंने धारा 163 लागू होने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि शहर में पिछले तीन माह से धारा 163 लागू है, तो इस दौरान कई सरकारी आयोजन भी हुए हैं। ऐसे में धार्मिक यात्रा को लेकर अलग-अलग नियम क्यों अपनाए जा रहे हैं।

उन्होंने वर्तमान विधायक और सांसद से भी इस मामले में ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता की होती है और जनप्रतिनिधियों को जनता की भावनाओं और मांगों को भी समझना चाहिए।

यात्रा को लेकर गांव-गांव में बैठकें

अंशुल शर्मा ने बताया कि वराह मार्च को लेकर संगठन की ओर से गांव-गांव में बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा में शामिल होने वाले वाहनों के लिए 10 रुपये की राशि रखी गई है। प्रत्येक वाहन पर झंडी और स्टीकर लगाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जिले के अलग-अलग गांवों में बैठकों का दौर चल रहा है और यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

उन्होंने प्रशासन पर यात्रा को लेकर गलत अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।

एसडीएम बोले- धारा 163 के कारण अनुमति निरस्त

वहीं, इस पूरे मामले में एसडीएम राजकुमार हलदर ने कहा कि शहर में धारा 163 लागू है। इसी के चलते वराह यात्रा की अनुमति निरस्त की गई है। प्रशासन का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है।

मुस्लिम समाज ने भी मांगी थी अनुमति

इधर, 15 सितंबर को मुस्लिम समाज की ओर से भी एक कार्यक्रम/जुलूस निकालने के लिए अनुमति मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन की ओर से उसे भी निरस्त किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में 15 सितंबर को लेकर शहर में प्रशासन की तैयारियां और दोनों पक्षों की गतिविधियां महत्वपूर्ण हो गई हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 सितंबर को वराह मार्च वास्तव में निकलता है या प्रशासन द्वारा इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल संगठन यात्रा निकालने की बात पर कायम है, जबकि प्रशासन धारा 163 लागू होने का हवाला दे रहा है। ऐसे में आगामी दिनों में प्रशासन और आयोजकों के बीच संवाद से कोई समाधान निकलता है या मामला और गरमाता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

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