होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का योग, 2 मार्च को प्रदोषकाल , रात्रि में होलिका दहन , 3 मार्च ग्रहण में ही धुलेंडी मनाई जाएगी ( डॉ. अशोक शास्त्री )
मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और चंद्र ग्रहण के साथ कुंभ राशि में चतुर्ग्रही योग का दुर्लभ संयोग बन रहा हैं , जिसे लेकर आम लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं । होलिका दहन 2 मार्च 2026 को सायं प्रदोषकाल 06:28 से 08:52 बजे तक रात्रि 11:50 से 12:50 बजे तक करना शुभ रहेगा । वहीं 3 मार्च पूर्णिमा को चंद्रग्रहण के होलिका दहन कारण वर्जित है ।
फाल्गुन का महीना अपने साथ रंग, उमंग और खुशियों का त्योहार लेकर आता है । देशभर में होली का पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है । परंपरा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन की जाती है । उसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है । इस साल होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं ।
डॉ. शास्त्री ने बताया कि इस साल होली 3 मार्च को पूरे देश में मनाई जाएगी । उनके अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 2 मार्च को शाम 5:53 बजे से हो रही है, जो 3 मार्च की 5:34 बजे तक रहेगी । सामान्य रूप से पूर्णिमा तिथि और भद्रा का संयोग में ही होलिका दहन किया जाता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है । जहां 2 मार्च को पूर्णिमा तिथि लगते ही भद्रा भी प्रारंभ हो जाएगी । भद्रा 3 मार्च की सुबह 5: 20 बजे तक रहेगी । शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल रहित पूर्णिमा में होलिका दहन किया जाता है । इसके अलावा 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है । ग्रहण के दिन शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है । इसी कारण 3 मार्च को होलिका दहन करना उचित नहीं रहेगा ।
2 मार्च को करें होलिका दहन
डॉ. शास्त्री के मुताबिक़ होलिका दहन 2 मार्च को ही किया जाना चाहिए । हालांकि उस दिन भी भद्रा का प्रभाव रहेगा, लेकिन शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखकर दहन किया जा सकता है । उन्होंने बताया कि 2 मार्च को सायं प्रदोष काल 06:28 से 08:52 बजे तक तथा रात्रि 11 :50 से 12:50 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा । इस बीच विधि-विधान से पूजन और दहन करना फलदायी माना जाएगा ।
डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन के समय ‘ॐ होलिकायै नमः’ मंत्र का जाप करे । मान्यता है कि इस मंत्र के जप से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है । होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है । यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चाई और आस्था की हमेशा विजय होती है ।
इस वर्ष भद्रा मृत्यु लोक में रहेगी, जिसे विशेष रूप से अशुभ माना जाता है । इसलिए लोगों को समय का विशेष ध्यान रखते हुए ही होलिका दहन करना चाहिए । डॉ. शास्त्री का कहना है कि शुभ मुहूर्त में किया गया पूजन सभी दोषों को शांत करता है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करता है ।
ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री ने कहा कि वहीं, 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण सायं 06:32 से दिखाई देगा और 6:47 बजे तक रहेगा । विरल छाया से निर्गम सायं 07:53 बजे तक रहेगा । ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाएगा । इसके अलावा सूतक काल में पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं । कुल मिलाकर इस वर्ष होली और होलिका दहन विशेष ग्रह-नक्षत्रों के संयोग में मनाए जाएंगे । इसलिए श्रद्धालुओं को पंचांग और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए ही पर्व मनाना चाहिए । ताकि त्योहार का पूरा शुभ फल प्राप्त हो सके ।









