
*नेशनल लोक अदालत में लंबित पंजीबद्ध मामलों में कुल- 964 मामलों का हुआ निराकरण*

*कुल मिलाकर सभी लंबित मामलों में 21.58 करोड़ रूपये की राशि के अवार्ड हुए पारित-2190 व्यक्ति हुए लाभान्वित*
*धार 14 मार्च 2026।* राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के संयुक्त तत्वाधान में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री संजीव कुमार अग्रवाल के अध्यक्षता में धार जिला अंतर्गत मुख्यालय धार एवं तहसील न्यायालय- कुक्षी, धरमपुरी, मनावर, सरदारपुर, बदनावर में वर्ष 2026 की प्रथम नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 को सफल आयोजन किया गया।
मध्यप्रदेश में नेशनल लोक अदालत का शुभांरभ मुख्य न्यायाधिपति म.प्र. उच्च न्यायालय जबलपुर श्री संजीव सचदेवा द्वारा ऑनलाईन माध्यम से किया गया। उक्त उद्घाटन कार्यक्रम में जिला-धार से प्रधान जिला एवं सत्र श्री संजीव कुमार अग्रवाल, विशेष न्यायाधीश श्रीमती मेरी मार्गरेट फा्रंसिस डेविड, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्रीमती पावस श्रीवास्तव, प्रथम जिला न्यायाधीश श्री पारस कुमार जैन, न्यायाधीश/सचिव श्री प्रदीप सोनी सहित जिला मुख्यालय पर पदस्थ समस्त न्यायाधीशगण, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री हितेष ठाकुर एवं अधिवक्तागण, एल.ए.डी.एस चीफ श्री सतीश ठाकुर एवं एल.ए.डी.एस टीम, बैंकिंग कंपनी मैनेजर, विद्युत वितरण कंपनी के पदाधिकारी, दूरसंचार विभाग एवं नगर पालिका के पदाधिकारी एवं न्यायालयीन कर्मचारीगण विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ए.डी.आर. सेन्टर धार से सम्मिलित हुए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण-धार, सचिव श्री प्रदीप सोनी द्वारा बताया गया कि नेशनल लोक अदालत हेतु संपूर्ण जिले के लिए कुल 41 खंडपीठों का गठन किया गया था। नेशनल लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के दाण्डिक एवं सिविल राजीनामा योग्य कुल 964 लंबित मामलों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया गया। जिसमें 2190 व्यक्ति लाभान्वित हुए व 21.58 करोड रूपये के अवार्ड पारित किये गये। साथ ही 1165 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें कुल 3.40 करोड़ रूपये राशि की वसूली विभिन्न विभागों द्वारा हुई तथा 1349 व्यक्ति लाभान्वित हुए।
इस प्रकार आज की नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सकल कुल 2129 प्रकरण निराकृत कर 24.99 करोड़ रूपये की राशि के अवार्ड पारित/वसूली हुई। जिसमें 3539 लोग लाभान्वित किये गये। लोक अदालत से निराकृत प्रकरण के पक्षकारों को वन विभाग के समन्वय से न्याय वृक्ष के रूप में जाम, बरगद, पीपल, आँवला आदि वितरित किये गये। नेशनल लोक अदालत के सूत्र वाक्य ना तो कोई जीता ना कोई हारा की तर्ज पर आपसी सहमति से पक्षकारों के मध्य राजीनामा होने से प्रकरणों का हमेशा-हमेशा के लिये अंत हुआ।
*सक्सेस स्टोरी*
*(नेशनल लोक अदालत दिनांक-14 मार्च 2026)*
लोक अदालत की पहल से मोटर दुर्घटना दावा में मृतक की 6 वारिसान पुत्र-पुत्रियों को मिली 16.25 लाख रूपये की अवॉर्ड राशि
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, धार(म.प्र.) के न्यायालय में आवेदिका कमला आदि ने अनावेदक श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी के विरूद्ध मोटर दुर्घटना दावा का मामला 23 अक्टूबर 2024 को प्रस्तुत किया था। जिनके मामले में अनेक स्तरो पर न्यायालयीन कार्यवाही हुई। नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 की पहल पर उभयपक्ष के मध्य आपसी राजीनामा हो गया है। मृतक रामसिंह पिता गुलाबसिंह के वारिसान पत्नी कमला एवं उसके 6 पुत्र-पुत्रियों को 16,25,000/- रुपये की अवॉर्ड राशि प्राप्त हुई। उभयपक्षों ने माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संजीव कुमार अग्रवाल के समक्ष प्रकरण में समझौता स्वीकार किया गया। लोक अदालत की पहल पर एक परिवार को जीवनयापन हेतु एक आस बंधी है जो भविष्य में जीवन हेतु लाभदायक होगी।
*अलग रह रहा परिवार बच्चों सहित एक हुआ-साथ रहने का लिया गया संकल्प*
कुटुम्ब न्यायालय, धार(म.प्र.) में लंबित प्रकरण अंतर्गत धारा 144 बी.एन.एस.एस. अंतर्गत भरण-पोषण के मामलें में आवेदिका माया एवं अनावेदक भारत के मध्य पारिवारिक बातों पर विवाद होने से आवेदिका अपने नाबालिक बच्चों के साथ डेढ़ वर्ष से अपने पति भारत से अलग रह रही थी। आवेदिका द्वारा माह फरवरी 2025 में कुटम्ब न्यायालय में भरण-पोषण अंतर्गत मामला संस्थित किया था। आवेदिका द्वारा न्यायालय के समक्ष अपने पति से भरण-पोषण दिलवाये जाने की मांग की थी, दोनों प़क्षों को नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 को बुलाकर समझाइश दी गई। जिसके उपरांत दोनों पक्ष साथ में रहने हेतु सहमत हुए। यह मामला नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया एवं नेशनल लोक अदालत के दिन दोनो पक्षों ने एक-दूसरे को माला पहनायी एवं खुशी-खुशी आपस में साथ-साथ रहना स्वीकार किया है। लोक अदालत की पहल पर एक टूटता हुआ परिवार पुनः एक हो गया है।
*’’बिखरता हुए परिवार हुए एक’’पारिवारिक मतभेद के कारण अलग रह रहे पति-पत्नी साथ रहने को हुए राजी*
कुटुम्ब न्यायालय, धार(म.प्र.) में लंबित प्रकरण धारा 144 बी.एन.एस.एस. अंतर्गत भरण-पोषण के मामलें में आवेदिका मुस्कान एवं अनावेदक आशीष पारिवारिक विवाद होने से आवेदिका महिला अपने पति आशीष से अलग रह रही थी। आवेदिका द्वारा 24 फरवरी 2025 को परिवार न्यायालय में भरण-पोषण अंतर्गत मामला संस्थित किया था। आवेदिका द्वारा न्यायालय के समक्ष अपने पति से भरण-पोषण दिलवाये जाने की मांग की थी, दोनो पक्ष अलग-अलग रह रहे थे। दोनों प़क्षों को बुलाकर समझाईस दी गई, समझाइश उपरांत दोनों पक्ष साथ में रहने हेतु सहमत हुए। यह मामला नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया। उभयपक्षों द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर नेशनल लोक अदालत से खुशी-खुशी अपने परिवार सहित घर लौटे।
*लोक अदालत की पहल से दंपत्ति हुए एक*
कुटुम्ब न्यायालय, धार(म.प्र.) अंतर्गत भरण-पोषण के मामलें में आवेदिका किरण एवं अनावेदक हेमंत के मध्य पारिवारिक विवाद होने से आवेदिका अपने पति से अलग रह रही थी। आवेदिका द्वारा वर्ष 2025 में कुटम्ब न्यायालय में भरण-पोषण अंतर्गत मामला संस्थित किया था, आवेदिका द्वारा न्यायालय के समक्ष अपने पति से भरण-पोषण दिलवाये जाने की मांग की थी, दोनों प़क्षों को नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 को बुलाकर समझाइश दी गई। जिसके उपरांत दोनों पक्ष साथ में रहने हेतु सहमत हुए। यह मामला नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया एवं नेशनल लोक अदालत के दिन दोनो पक्षों ने एक-दूसरे को माला पहनायी एवं खुशी-खुशी आपस में साथ-साथ रहना स्वीकार किया है।
*पारिवारिक विवाद सुलझा दंपत्ति हुए एक*
कुटुम्ब न्यायालय, धार(म.प्र.) मे लंबित (सिविल प्रकरण) दावा विवाह विच्छेद की घोषणा के मामले में आवेदक गोपाल एवं अनावेदिका रानी के मध्य पारिवारिक विवाद होने से आवेदिका अपने पति से अलग रह रही थी। आवेदक व अनावेदिका का विवाह वर्ष 2019 में हुआ था और इनका एक पुत्र भी है। दोनों प़क्षों को नेशनल लोक अदालत 14 मार्च 2026 को बुलाकर समझाइश दी गई, जिसके उपरांत दोनों पक्ष साथ में रहने हेतु सहमत हुए। यह मामला नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किया गया एवं नेशनल लोक अदालत के दिन दोनो पक्षों ने एक-दूसरे को माला पहनायी एवं खुशी-खुशी आपस में साथ-साथ रहना स्वीकार किया है।
उपरोक्तानुसार सभी दंपत्तियों को समझौता स्वरूप फलदार वृक्ष प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमान संजीव कुमार अग्रवाल साहब के हस्ते प्रदान किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय श्रीमती पावस श्रीवास्तव एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री प्रदीप सोनी अन्य न्यायाधीशगण एवं सुलहकर्ता सदस्य उपस्थित रहें।
*चाय पे हुई चर्चा से कुक्षी न्यायालय में अनोखे प्रकरण मे हुआ समझौता -एक समझौते से 17 प्रकरणों का हो सकेगा निराकरण*
डॉ. श्रीमती आरती शुक्ला पाण्डेय, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, कुक्षी की खण्डपीठ में पीठासीन व खण्डपीठ सदस्य श्रीमती गायत्री पाटीदार की समझाईश से एक पति पत्नि के मध्य एक अभूतपूर्व समझौता हुआ। जिसके माध्यम से कुल लंबित 17 प्रकरणों पर राजीनामा पर सहमति हुई। उक्त मामला प्रिया विरूद्ध राकेश(परिवर्तित नाम) के मध्य था। दोनों का विवाह वर्ष 2008 मे हुआ था। जिससे उन्हें एक पुत्र एवं एक पुत्री का भी जन्म हुआ था। वर्ष 2013 तक उनके मध्य आपसी विवाद से मतभेद पैदा होने लगे। जिस कारण दोनो पति-पत्नि अलग-अलग रहने लगे। पत्नी के द्वारा पति के विरूद्ध भरण-पोषण, घरेलू हिंसा, हिंदु विवाह, दहेज प्रताडना के केस लगाए। तत्पश्चात वसूली के केस भी चले जिस पर पति के द्वारा हिंदु विवाह अधिनियम के तहत प्रकरण लगाया एवं प्रकरणों में अपील रिविजन भी की गई है। तत्पश्चात उनके मध्य लिटिगेशन बढ़ता गया। दोनो ही पक्ष अपीलीय न्यायालय के समक्ष मुकदमेबाजी करने लगे। विवाद बढ़ता रहा तो मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। उसके बाद इस वर्ष प्रथम नेशनल लोक अदालत में प्रथम जिला न्यायाधीश कुक्षी डॉ. श्रीमती आरती शुक्ला पाण्डेय की खण्डपीठ में दोनो पक्षकारो से बातचीत की और चाय पर चर्चा करते हुए उन दोनों ही पक्षकारो का इतने सरल तरीके समझाया कि उन्हें बात समझ आ गई। दोनो ही पक्षों ने आत्मचिंतन किया और उनके मध्य 15 वर्ष पुरानी लड़ाई का निष्कर्ष निकला। जिनसे उनके मध्य निचले से लेकर माननीय उच्च न्यायालय तक के कुल 17 प्रकरणों के समझौते पर सहमति हुई। दोनों ही पक्षों ने डॉ. पाण्डेय का धन्यवाद किया।









