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नेशन बुलेटिन धार। महाशिवरात्रि पर श्रृंगेश्वर महादेव धाम में उमड़ेगा आस्था का जनसैलाब, झकनावदा में निकलेगी भव्य झांकी।

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*झकनावदा/पेटलावद:-( राजेश काॅसवा)-*

 

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर क्षेत्र के प्रसिद्ध एवं पौराणिक ग्रंथों में अंकित प्राचीन तीर्थ स्थल श्रृंगेश्वर महादेव धाम में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। मधुकन्या नदी एवं माही नदी के पवित्र संगम पर स्थित यह धाम वर्षों से शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पर्व को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और पुष्पों से सजाया गया है।

 

*अल सुबह से प्रारम्भ हो जायेगे धार्मिक अनुष्ठान*

 

महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रातःकाल से ही जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन-अर्चन का क्रम प्रारंभ होगा। दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। मंदिर समिति द्वारा भक्तों की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

 

*झांकी और शोभायात्रा का आयोजन*

 

झकनावदा में महांकाल मित्र मंडल के तत्वावधान में भव्य झांकी एवं एवं बाबा भूतेश्वर महादेव की बेंड बाजों ढोल के साथ नगर में नाचते झूमते बारात निकाली जाएगी। झांकी में नगर में विराजित भगवान श्री केसरियानाथ जी का आकर्षक का चित्रण किया जाएगा। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ निकाली जाने वाली यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। आयोजन समिति महाँकाल मित्र मंडल के सदस्यों ने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

 

*मधुकन्या तट पर हर्षोल्लास*

 

इसी कड़ी में मधुकन्या नदी तट स्थित बाबा भूतेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी महाशिवरात्रि पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। रात्रि जागरण, भजन संध्या और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु देर रात ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ शिव भक्ति में लीन रहेंगे।

 

*विशेष कथा: क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि ?*

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव ने तांडव कर सृष्टि के संचालन का संकल्प लिया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने इसी दिन ग्रहण कर संसार की रक्षा की थी, जिससे उनका नाम ‘नीलकंठ’ पड़ा। माना जाता है कि इस पावन रात्रि में सच्चे मन से व्रत, उपवास और रुद्राभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आंकडे का फुल व फल और जल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है।

 

*प्रशासन और समिति सतर्क*भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन नायब तहसीलदार विजेंद्र कटारे एवं झकनावदा चौकी प्रभारी सुरेंद्रसिंह सिसोदिया के द्वारा सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्वयंसेवक दल श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने में सहयोग करेंगे। महाशिवरात्रि पर श्रृंगेश्वर महादेव धाम एक बार फिर शिवमय वातावरण से गुंजायमान रहेगा। संगम तट पर आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

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