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नेशन बुलेटिन धार। सेना की अधिकारी से लेकर लाड़ली बहना तक: विजय शाह बयान विवाद में सुप्रीम कोर्ट का सख़्त रुख।

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नई दिल्ली / भोपाल।

मध्य प्रदेश की राजनीति में बीते कुछ समय से जो मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, वह है मंत्री विजय शाह और भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़ा विवाद। यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सम्मान, संविधान, सेना, महिलाओं की गरिमा और कानून से जुड़ता चला गया।

*विवाद की शुरुआत:*

विजय शाह ने क्या कहा?

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी कर दी।

यह बयान न केवल व्यक्तिगत था, बल्कि एक सेवारत महिला सैन्य अधिकारी, सेना की गरिमा और देश की संवैधानिक मर्यादाओं पर सीधा सवाल खड़ा करता नजर आया। जैसे ही यह बयान सामने आया, सोशल मीडिया पर विरोध तेज हुआ, राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और सेना के सम्मान को लेकर देशभर में नाराजगी देखने को मिली।

*लाड़ली बहना योजना पर भी टिप्पणी:*

विवाद यहीं नहीं रुका। इसी बयान क्रम में मंत्री विजय शाह द्वारा लाड़ली बहना योजना को लेकर की गई टिप्पणी पर भी सवाल उठे। आरोप लगे कि योजना का ज़िक्र करते हुए इस्तेमाल की गई भाषा और संदर्भ महिलाओं की गरिमा के अनुरूप नहीं थे। महिला संगठनों और विपक्ष ने इसे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना और प्रदेश की बहनों के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई। इससे मामला और संवेदनशील हो गया क्योंकि एक तरफ सेना की महिला अधिकारी, तो दूसरी तरफ प्रदेश की लाखों महिलाएं इस विवाद के केंद्र में आ गईं।

*कानूनी मोड़:*

FIR और कोर्ट की एंट्री बयान के बाद मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं रहा। विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और मामला पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि सेना के अधिकारियों और महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणियां लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।

*पहली माफी:*

विवाद बढ़ने और कानूनी कार्रवाई शुरू होने के बाद विजय शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। लेकिन यह माफी उस समय आई जब बयान देशभर में फैल चुका था और मामला अदालत तक पहुंच चुका था, इसलिए इसे प्रभावी नहीं माना गया।

*दूसरी माफी:*

वीडियो के जरिए सफाई मामला शांत न होता देख विजय शाह ने एक वीडियो संदेश जारी कर दूसरी बार माफी मांगी। शब्द इस बार ज्यादा संयमित थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि माफी बहुत देर से आई है।

*सुप्रीम कोर्ट का रुख:*

मामला खत्म नहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि केवल माफी के आधार पर मामला समाप्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जांच जारी रखने के निर्देश दिए और राज्य सरकार से पूछा कि अभियोजन की अनुमति दी जाएगी या नहीं।

*तीसरी माफी:*

सुनवाई से ठीक पहले हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले विजय शाह ने तीसरी बार सार्वजनिक रूप से माफी दोहराई। लेकिन कोर्ट का रुख इस बार भी नरम नहीं दिखा और साफ कहा गया कि फैसला भावनाओं पर नहीं, कानून के आधार पर होगा।

👉 *आज की स्थिति:*

फैसला नहीं, लेकिन चेतावनी साफ,आज सुनवाई में फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने गेंद सीधे मध्य प्रदेश सरकार के पाले में डाल दी है।अब सरकार को तय करना है कि मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलेगा या राजनीतिक संरक्षण दिया जाएगा।

मामला सिर्फ विजय शाह का नहीं, यह विवाद अब सिर्फ एक मंत्री के बयान तक सीमित नहीं है। यह सवाल बन चुका है, सेना के सम्मान का,महिला अधिकारियों और प्रदेश की बहनों की गरिमा का,और सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही का।

देश की नजर अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और मध्य प्रदेश सरकार के फैसले पर टिकी है।

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