अमरोहा की 11वीं की छात्रा अहाना की मौत ने देशभर के माता‑पिता और टीनएजर्स को झकझोर दिया है। फास्ट फूड के बढ़ते चलन के बीच यह घटना एक करारा सबक बनकर सामने आई, जहां स्वाद की ज़िद ने धीरे‑धीरे एक होनहार लड़की की जान ले ली।
फास्ट फूड की आदत ने बिगाड़ा हाल
अहाना 16 साल की थी और अमरोहा के एक स्कूल में कक्षा 11 की छात्रा थी। घरवालों के मुताबिक उसे बचपन से चाऊमीन, मैगी, पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड का इतना शौक था कि मना करने के बावजूद वह अक्सर बाहर का खाना ही चुनती थी, जबकि घर का सादा, दाल‑चावल या सब्जी‑रोटी से वह कतराती रहती थी। धीरे‑धीरे यह आदत उसकी नियमित डाइट बन गई; यानी पेट को आराम देने वाला हल्का खाना कम और मसालेदार, तला‑भुना, मैदा‑भरा खाना ज़्यादा।
कुछ महीनों बाद अहाना को पेट में लगातार दर्द, भारीपन, गैस और कमजोरी की शिकायतें शुरू हो गईं। शुरुआत में परिवार ने सोचा कि यह सामान्य बदहजमी है, इसलिए हल्की दवाओं और घरेलू नुस्खों से काम चलाया गया। लेकिन दर्द कम होने के बजाय बढ़ता गया, वजन घटने लगा और रोजमर्रा के कामों में भी थकान महसूस होने लगी।
जब जांच में सामने आया डरावना सच
आखिरकार परिजन उसे बड़े शहर के डॉक्टर









