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नेशन बुलेटिन धार।दसलक्षण पर्व के प्रथम दिन में आज से शुरू हुए समवसरण विधान में समवसरण का महत्व।

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*दसलक्षण पर्व के प्रथम दिन में आज से शुरू हुए समवसरण विधान में समवसरण का महत्व*

दिगंबर जैन धार समाज में इस वर्ष दसलक्षण पर्व के पुनीत पावन अवसर पर उपाध्याय 108 श्री विभंजन सागरजी मुनिराज और मुनि श्री विश्वज्ञेय सागरजी मुनिराज के सानिध्य में आज से शुरू हुआ समवसरण विधान!
श्री दिगंबर जैन महिला महासमिति मध्य प्रदेश की महामंत्री ओम श्री राष्ट्रीय जैन एकता मंच की जिला अध्यक्ष धार श्रीमती ममता गंगवाल ने बताया कि समवसरण क्या है और जैन धर्म में समवसरण का क्या महत्व है?
समवशरण जैन धर्म में एक दिव्य उपदेश स्थल है जो तीर्थंकरों द्वारा स्थापित किया जाता है। यह एक ऐसा स्थान है जहां सभी जीवों को समान रूप से ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
समवशरण के बारे में कुछ मुख्य बातें:
समवशरण क्या है?
समवशरण तीर्थंकर भगवान की धर्मसभा को कहते हैं.
समवशरण का निर्माण कौन करता है?
तीर्थंकर के केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद, सौधर्म इन्द्र की आज्ञा से कुबेर समवशरण की रचना करते हैं.
समवशरण की मुख्य विशेषताएँ:
समवशरण में, जन्मजात विरोधी प्राणी भी मैत्रीभाव धारण कर, आपसी प्रेम का परिचय देते हैं.
समवशरण में, भगवान के शरीर से एक विचित्र गर्जना रूप ऊँकार ध्वनि निकलती है, जिसे दिव्यध्वनि कहते हैं, और यह अर्द्ध मागधी भाषा में होती है.
समवशरण में, भगवान के आठ प्रातिहार्य होते हैं: अशोक वृक्ष, सिंहासन, तीन छत्र, भामंडल, दिव्यध्वनि, पुष्पवृष्टि, चौंसठ चंवर और दुदुभि बाजे.
समवशरण में प्रवेश:
समवशरण में केवल संज्ञी पंचेन्द्रिय जीव ही प्रवेश कर सकते हैं.
मानस्तम्भ:
समवशरण के प्रवेश द्वार पर चार मानस्तम्भ होते हैं, जिन्हें देखने मात्र से मानी जीवों का मान कम हो जाता है.
समवशरण में विभिन्न प्रकार के जीव:
समवशरण में मनुष्य, तिर्यंच, देव और देवांगनाएँ सभी आते हैं.
समवशरण में प्रश्नों के उत्तर:
भगवान के शरीर से निकलने वाली दिव्यध्वनि से सभी जीवों को उनकी अपनी-अपनी भाषाओं में प्रश्नों के उत्तर मिल जाते हैं.
सात भव:
समवशरण में भगवान के पीछे भामंडल में, एक वर्तमान भव और तीन आगे आने वाले भव, इस प्रकार कुल सात भव दिखते हैं.
समवशरण से जुड़े कुछ प्रश्न:
समवशरण में कौन से जीव प्रवेश कर सकते हैं?
समवशरण में केवल संज्ञी पंचेन्द्रिय जीव ही प्रवेश कर सकते हैं.
समवशरण में अभव्य जीव प्रवेश क्यों नहीं कर पाते?
समवशरण में सातवीं भूमि के आगे भव्य कूट नामक स्तूप होते हैं, जिन्हें अभव्य जीव देख नहीं पाते हैं.
समवशरण में मिथ्यादृष्टि जीव सम्यग्दर्शन कैसे प्राप्त कर सकते हैं?
समवशरण में मानस्तम्भ के दर्शन करने से सम्यग्दर्शन प्राप्त हो जाता है.
समवशरण में कौन-कौन से प्रातिहार्य होते हैं?
समवशरण में आठ प्रातिहार्य होते हैं.
समवशरण का महत्व: समवशरण जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि यह सभी जीवों को ज्ञान प्राप्त करने और मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है!

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