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धार। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए प्रदेश की विकास नीतियों पर सवाल, पूछा – मेकिंग मध्यप्रदेश कब बनेगा?

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*नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उठाए प्रदेश की विकास नीतियों पर सवाल, पूछा – मेकिंग मध्यप्रदेश कब बनेगा?*

आज मध्यप्रदेश विधानसभा में महानगर विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वक्तव्य पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि “मेकिंग मध्यप्रदेश” की बात तो हो रही है, लेकिन इसका स्वरूप कब और कैसे साकार होगा, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि करोड़ों का निवेश आया, लेकिन यह कब और कहां आया – यह जनता को समझ में नहीं आया।

श्री सिंघार ने कहा कि सरकार किसानों को मुआवजा नही दे पा रही। सरकार कहती है कि 120 इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जा रहे हैं – तो उद्योगपतियों को क्यों नहीं कहा जाता कि वे स्वयं बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) तैयार करें? उन्होंने सुझाव दिया कि महाराष्ट्र की तरह मध्यप्रदेश में भी प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क की संकल्पना पर काम होना चाहिए और जरूरत पड़े तो सरकार अनुदान दे।

श्री सिंघार ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया। उन्होंने कहा – जिसे सरकार आकांक्षी युवा कहती है, उसे रोजगार कैसे मिलेगा? उन्होंने बताया कि प्रदेश प्याज उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है, लेकिन निर्यात नहीं हो पा रहा। क्या इसके लिए प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स नहीं लगाई जा सकतीं?

उन्होंने इंदौर के सांवेर औद्योगिक क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि जहां पहले 500 से अधिक इकाइयाँ थीं, आज वहां केवल 100 बची हैं। उन्होंने कहा जमीनी स्तर पर कंपनियों को कोई वास्तविक प्रोत्साहन नहीं दिया जा रहा। श्री सिंघार ने कहा कि सरकार IT सेक्टर की बात तो करती है, लेकिन आईटी कंपनियां मध्यप्रदेश नहीं आ रहीं। बड़ी कंपनियां लगातार बंद हो रही हैं। टूरिज्म सेक्टर में गिरावट है और पर्यावरण से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने मेडिकल टूरिज्म पर भी सवाल उठाया – जब मरीज इलाज के लिए प्रदेश से बाहर जा रहे हैं, तो यह कौन सा मेडिकल टूरिज्म है जिसकी बात सरकार कर रही है।

श्री सिंघार ने कहा कि सरकार जनता के पैसों से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप कर रही है, लेकिन इसका लाभ न जनता को मिल रहा है, न किसानों को और न ही उद्योगों को मजबूती मिल रही है। सरकार को अपनी नीतियों पर गहराई से विचार करना चाहिए और धरातल पर काम करके दिखाना चाहिए।

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