*वनाधिकार पट्टों को लेकर आदिवासियों के साथ अन्याय कर रही है सरकार – नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार*
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों के वनाधिकार दावों को निरस्त किए जाने और उन्हें बेदखल किए जाने के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने यह मुद्दा मजबूती से उठाया और कहा कि सरकार की नीयत साफ नहीं है। जो आदिवासी पीढ़ियों से जंगलों पर निर्भर हैं, उनसे उनकी ज़मीन छीनकर सरकार निजी हाथों में सौंपना चाहती है।
*नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि* प्रदेश में अब तक लगभग 3 लाख 22 हजार वनाधिकार पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं, जो आदिवासी समाज के साथ खुला अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करते हुए स्पष्ट बदलाव करने की आवश्यकता है। सिंघार ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
*नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि* पिछले 10 वर्षों में 41 करोड़ पौधे लगाने का दावा किया गया है, जो प्रदेश की जनसंख्या से भी अधिक है। उन्होंने पूछा कि इतने पौधे आखिर कहां लग गए? उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सरकार में नर्मदा किनारे लाखों पौधे लगाने का दावा किया गया था, लेकिन एक भी पौधा नहीं बचा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि क्या जनता का पैसा इसी तरह बर्बाद किया जाएगा?
*उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि* सैटेलाइट इमेजरी और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सरकार 2005 के पहले के दावों का पता लगा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए हर मंच पर संघर्ष करते रहेंगे।