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धार में आवारा कुत्ते के काटने से 11 वर्षीय मासूम की मौत।

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धार में आवारा कुत्ते के काटने से 11 वर्षीय मासूम रुद्रांश घोड़कर की मौत । मासूम की मौत से क्षेत्र के निवासियों में भी गम एव आक्रोश । क्षेत्र वासियों का आरोप नगरपालिका व प्रशासन की लापरवाही से गरीब परिवार का इकलौता चिराग बुझा ।
शहर के बनियावाड़ी क्षेत्र में 15 फरवरी को ट्यूशन जाने के दौरान रूद्रांश को मधलीआली में आवारा कुत्ते ने काटा था । ढाई माह जींदगी की जंग लड़ते हुए रूद्रांश तो हमेशा के लिए सो गया लेकिन पिता को जीते जी मार गया रुद्रांश को बचाने के लिए उसके पिता ने बाजार से कर्ज लेकर उसे बचाने का हर संभव प्रयास किया था ।
भोज चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ मुकुंद बर्मन ने बताया कि चिकित्सालय में प्रति माह करीब 20 से 30 पेशेंट कुत्तों के काटने के आते हैं जिन्हें रेबीज के डोज लगाए जाते हैं । ऐसे पेशेंट को रेबीज के कुल पांच इंजेक्शन का डोज लगाया जाता है जो कुछ दिनों को छोड़कर अलग-अलग तारीखों पर लगाया जाता है । ऐसे पेशेंट को पांच इंजेक्शन का डोज कंप्लीट मिल जाता है तो उस पेशेंट को रेबीज का खतरा ना के बराबर हो जाता है इसमें अंतिम डोज इम्यूनोग्लोबिन है जो पेशेंट को रेबीज के खतरे से पूरी तरह बचाता है । कंप्लीट डोज न होने की दशा में रेबीज का खतरा बना रहता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है ।
गरीब परिवार के 11 वर्षीय रुद्रांश की मौत के पश्चात उनके पिता हेमंत घोडकर शांत नजर आए लेकिन उनका कहना है कि जो घटना उनके बच्चे के साथ घटी ऐसी घटना किसी अन्य परिवार में किसी बच्चे के साथ ना हो इस पर ध्यान देना चाहिए । जिस कुत्ते ने रुद्रांश को काटा है वह आज भी मोहल्ले में घूम रहा है नगर पालिका ने उसे पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया । मृतक रुद्रांश के पिता ने एनजीओ पर भी सवाल खड़े किए हैं जो कुत्तों को पकड़ने नही दे रहे हैं । रुद्रांश के चाचा यश घोड़कर ने रुद्रांश की मौत के लिए अस्पताल को जवाबदार माना जिन्होंने रुद्रांश को रेबीज इम्यूनोग्लोबिन का टीका नहीं लगाया । मृतक रुद्रांश के मोहल्ले में रहने वाले प्रकाश हीरवले ने कहां की रुद्रांश की मौत ने हम सभी को झकझोर दिया है ‌। गरीब घोड़कर परिवार का इकलौता चिराग नगर पालिका एवं प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गया । इसके लिए यह लोग जवाबदारी हैं पूरा शहर आवारा मवेशियों कुत्तों से परेशान है इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है । रुद्रांश की मौत कई सवाल खड़े कर गई है जिसका जवाब स्थानीय प्रशासन , जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को देना है कि,लावारिस बने धार शहर का आखिरकार कोई वारिस है कि नहीं ।आपको बता दें कि धार शहर में ही पिछले दिनों बसंत विहार कॉलोनी में मां बेटे दोनों कुत्ते के काटने से घायल हो गए थे । इस घटना में मां अपने बच्चे को तो बचाने में सफल हो गई लेकिन अपनी जिंदगी न बचा पाई । शहर में आवारा कुत्तों व अन्य मवेशियों के कारण हो रही घटनाओं के बाद जवाबदार अधिकारियों द्वारा कार्यवाही किए जाने की बात तो कही जाती है लेकिन कोई कार्यवाही होती नहीं है जिसका खामियाजा आए दिन आम जनता भुगतने को मजबूर है ।

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