साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा, जिसके चलते सूतककाल मान्य होगा ।
ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार यह चंद्र ग्रहण 3 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर लगेगा। इस दौरान मन के कारक चंद्रमा सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। इस बार होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया रहने वाला है। हिंदू पंचाग के अनुसार, 2 मार्च को होलिका दहन और 3 मार्च को होली खेली जाएगी।
चंद्र ग्रहण का आरम्भ दोपहर 02:16 बजे से होगा । मुख्य प्रभाव दोपहर 03:21 बजे से दिखाई देगा। सायं 6:46 बजे से चंद्रमा ग्रहण से बाहर आने लगेगा। सूतक प्रातःकाल 06:32 बजे से शुरू होकर सायं 06:46 बजे तक रहेगा।
डॉ. शास्त्री के अनुसार भारत में भी दिखेगा साल का पहला चंद्रग्रहण । यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में भी दिखाई देगा। चूंकि भारत में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा।
चंद्र ग्रहण सबसे ज्यादा प्रभाव पूर्वी भारत यानी अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम में दिखाई देगा। पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्सों के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ, और जयपुर जैसे शहरों में भी यह दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
डॉ. शास्त्री के अनुसार, धनु, मेष, सिंह, वृषभ और मकर राशि वालों के लिए चंद्र ग्रहण लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। इस अवधि में कोई वाहन या प्रापर्टी खरीदने के योग बन सकते हैं। आय, साहस और पराक्रम में वृद्धि के प्रबल संकेत हैं। व्यापारियों को धनलाभ के साथ नौकरीपेशा को वेतनवृद्धि व पदोन्नति का लाभ मिल सकता है।। देश- विदेश की यात्रा कर सकते हैं। समाज में मान- सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती है। कर्क, कुंभ और मीन राशि वालों पर ग्रहण नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। किसी भी काम में जल्दबाजी ना करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। डॉ. शास्त्री के मुताबिक़ यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि पर मान्य है । अतः इन राशि वालो को ग्रहण दर्शन नहीं करना चाहिए । बल्कि अपने ईष्ट देव की आराधना , गुरु मंत्र जाप, व धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना चाहिए ।
डॉ. शास्त्री के मुताबिक़ इस चंद्र ग्रहण का दुष्प्रभाव कश्मीर, बंगाल, सुदुर जंगल भाग, पशु , राष्ट्रीय विचारक पुरुष , उच्च उद्योगपति, श्रीमंत , मालवा क्षेत्र , विन्ध्याचल क्षेत्र , महापुरुष विशेष , एवं शिल्पकार, दंभी – घमंडी, कुमारी कन्या, अस्त्र – शस्त्र निर्माता, फ़िल्म निर्माता, अभिनय कर्ता, गायक वादक तथा महिला वर्ग , पर विशेष प्रभावक कष्टसूचक । वस्तु पदार्थ दृष्टि से शहद, श्रीफल , विविध फल, सूत- कपास- वस्त्र , नमक, चावल, चना, गुड, जौ,गेहूँ, जुवार, अलसी, सरसों, अरंडा, तांबा, विविध तरल रस, पदार्थ तथा काली- पीली रंग वस्तु पर तेजी का प्रभाव होगा , तथा व्यवसाय लाभप्रद रहेगा ।
ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए।
ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।









