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नेशन बुलेटिन धार। वन स्टॉप सेंटर (सखी) ने आठ परिवारो में सुलह समझौता कर पुनः बसाये घर।

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धार, 26 फरवरी 2026। कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा के निर्देषानुसार एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एंव बाल विकास विभाग श्री सुभाष जैन के मार्गदर्शन में किसी भी तरह की हिंसा से पीडित महिलाओं व बालिकाओं की सहायता हेतु संचालित वन स्टॉप सेन्टर धार द्वारा निरंतर प्रयास कर बिखरे परिवार को जोडने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी कडी में वन स्टॉप सेन्टर द्वारा 8 परिवार की काउसलिंग के बाद सुलह समझौता कर पुनः परिवारो की खुशियां लौटाई। प्रशासक वन स्टॉप सेन्टर श्रीमती ज्योत्सना सिंह ठाकुर ने बताया कि वन स्टॉप सेन्टर (सखी) 2 मार्च 2018 से जिला भोज हॉस्पीटल परिसर में संचालित किया जा रहा, यहा अब तक 2112 प्रकरण विभिन्न हिंसा के तरह दर्ज हुऐ है। किसी भी तरह की हिंसा से पीडित महिला व बालिका को वन स्टॉप सेन्टर (सखी) पर एक पारिवारिक व दोस्ताना माहौल प्रदान जाता है जिससे वह निर्भय होकर अपनी परेषानी बता सके और वन स्टॉप सेन्टर उनकी सहायता प्रदान कर सके और परिवार को खुष्यिा लौटा सके।

इसी अर्न्तगत प्राप्त प्रथम प्रकरण मे पिता की मृत्यु के बाद बडे भाई द्वारा अपनी छोटी बहन के साथ आये दिन शराब पीकर लडाई झगडा मारपीट की जाती और मॉ के साथ भी मारपीट की जाती थी। आवेदिका द्वारा बताया गया कि वह मेहनत मजदूरी कर अपना व अपनी मां का भरण पोषण व अन्य खर्च स्वयं ही उठाती फिर भी भाई प्रताडित कर उसे घर से जाने को कहते कि तु परायी है शादी कर और जा अपने घर। प्रर्थिया ने अपने भाई के विरूद्ध प्रकरण दर्ज करवाया दोनों पक्षों की काउसलिंग कर समझाइश दी गई कि दोनों एक ही माता पिता की संतान है खून का रिश्ता है किसी भी परिवार में भाई-बहन एक दुसरे के पूरक होते है और उससे ज्यादा परिवार की रोनक होती है। अतः सारे गिले शिकवे भूलकर साथ मे प्यार से रहे। समझाईश के बाद दोनों का समझौता हुआ अपने रिश्ते प्यार से निभाने का आश्वासन दिया गया।

दुसरे प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि उनके पति छोटी सी बात पर लडाई कर घर छोड कर अपने भाई भाभी के पास रहने चले गये उनके मोबाइल नंबर भी ब्लेक लिस्ट में डाल दिये उनके दो बच्चे है और पिछले 2 माह से संपर्क नही हो पा रहा। वह अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण, स्कूल खर्च एकदम कहां से लाये क्यूकिं वह तो कोई काम ही नही करती। प्राथर््िाया के पति को वन स्टॉप सेन्टर बुलवाया गया दोनों पक्षों की दो से तीन काउसलिंग की गई। विपक्षी को हर छोटी बात मे घर छोड कर जाने की आदत है। ऐसा प्रार्थिया ने बताया। विपक्षी को समझाया गया कि उनकी इस आदत से उन्हें नुकसान हो सकता है। अपनी जिम्मेदारी को ठीक से निभाये और प्रार्थिया के साथ आराम से जाकर रहें। आपसी समझौते के बाद दोनों पक्ष साथ में अपने घर लौटे तीसरे प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उनके विवाह को तीन वर्षो में 2 बेटी हो चूकी और तीसरा गर्भपात करवाया गया। क्योंकि दो बेटियां बहुत छोटी है। प्रार्थिया को अत्यधिक कमजोरी हो गई, जिसकी वजह से प्रार्थिया से ज्यादा काम नही हो पाता। इसी बात से लडाई झगडा होता और मारपीट कर प्रार्थिया को घर से बाहर निकाल दिया और पिता को आकर ले जाने को कहा आवेदन के आधार पर पति को समझाया गया कि एक महिला का शरीर मशीन नही होती, अपनी पत्नी की परेशानी को समझे और उसे सहयोग करे मारपीट लडाई झगडा न करे और पत्नी व बेटियों को भी प्यार व सम्मान से रखें। दोनों पक्षों का आपसी सहमती से समझौता करवाया गया।

चौथे प्रकरण में शादी को एक वर्ष हुआ। और पति लड़ाई झगड़ा मारपीट करने लगे और दहेज कम लाने पर प्रताडित करने लगें दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर आपसी सहमती से समझौता करवाया गया। पॉच वे प्रकरण में पति शंका के आधार पर आये दिन लड़ाई झगड़ा करते और प्रार्थिया का फोन हेक कर उस पर जासुसी कर रहे थे। प्रार्थिया को पता चला तो उन्होने आवेदन दिया और काउंसलिंग पर दोनों पक्षों को समझाईश पर समझौता होने पर पति द्वारा विश्वास दिलवाया की आगे से ऐसा कुछ नही करेगें।

साथ ही अन्य प्रकरण में भी काउंसलर चेतना राठौर द्वारा दोनों पक्षों की दो से तीन काउंसलिंग कर दोनों पक्षों का आपसी समझौता करवाया गया। आरक्षक संतोषी कटारिया, काउंसलिंग के दौरान उपस्थित थी। प्रकरणों की केस हिस्ट्र केस वर्कर लीला रावत, सरिता चौहान द्वारा बनाई गई। एवं निर्मला बामनिया उपस्थित थे।

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