
धार, 30 जनवरी 2026।* महाराजा भोज की नगरी धार में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को विभिन्न विषयों पर गहन अध्ययन के लिए एक समर्पित शोध केंद्र की आवश्यकता है। कालिदास संस्कृति अकादमी उज्जैन व मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के माध्यम से धार में महाराजा भोज शोध केंद्र स्थापित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। इस संबंध में न केवल कालिदास अकादमी बल्कि संस्कृति विभाग के मंत्री एवं मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जाएगी ।

यह बात शुक्रवार को आयोजित भोज समारोह को संबोधित करते हुए धार विधायक श्रीमती नीना वर्मा ने कही। कालिदास संस्कृति अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृत परिषद, उज्जैन के तत्वावधान में महाराजा भोज के विराट व्यक्तित्व एवं उनकी सारस्वत साधना को केंद्र में रखकर आयोजित संगोष्ठी में विधायक श्रीमती वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने बताया कि धार में अन्य विकास कार्य भी निरंतर प्रगति पर हैं। मेडिकल कालेज का कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। साथ ही महाकाल लोक की तर्ज पर धारनाथ लोक में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से 750 व्यक्तियों की क्षमता वाला केंद्र भी तैयार किया जाएगा। आने वाले समय में धार को कई नई सौगातें मिलेंगी, जिससे यह शहर शिक्षा व संस्कृति कर महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यह आयोजन महाराज भोज फाउंडेशन व महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार के सहकार से धार कालेज में आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम में कालिदास संस्कृति अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गंधे ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि भविष्य में महाराजा भोज समारोह को और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक श्रीमती नीना वर्मा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को अकादमी द्वारा प्रत्येक स्तर पर सहयोग किया जाएगा। धार में महाराजा भोज पर आधारित शोध केंद्र की स्थापना हो सके और देश-विदेश के विद्यार्थी यहां अध्ययन कर सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशेष अतिथि महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार की जनभागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री दीपक बिड़कर ने कहा कि आज हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात करते हैं, लेकिन राजा भोज अपने समय में ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत अग्रणी थे। उनके द्वारा रचित ग्रंथ एवं बहुविषयक अध्ययन आज के आधुनिक युग में भी प्रासंगिक हैं। इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि उस समय सुरक्षा व्यवस्था के लिए यांत्रिक साधनों का उपयोग किया जाता था, जो उनकी दूरदृष्टि को दर्शाता है। महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार के प्राचार्य डा एसएस बघेल ने कहा इस वर्ष विद्यालय तथा महाविद्यालय के छात्रों को समारोह से जोड़ने के लिए कविता लेखन व निबंध लेखन एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था। इसके प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार भी प्रदान किए गए है।

*गौरवशाली इतिहास को समझ सकेंगे*
सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित ग्वालियर के शोधकर्ता एवं शिक्षाविद जीवाजी विश्व विद्यालय के पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. शिवाकांत द्विवेदी ने कहा कि वे लगभग 41 वर्ष पूर्व धार की भोजशाला आए थे, जहां अनेक महत्वपूर्ण पाषाण पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, जो तत्कालीन इतिहास को दर्शाती हैं। महाराजा भोज पर और अधिक गहन शोध की आवश्यकता है, इसके लिए जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से जागरूक होकर सहयोग करना होगा, तभी विद्यार्थी अपने गौरवशाली इतिहास को समझ सकेंगे।
*शोध संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र*
आज आयोजित शोध संगोष्ठी में पन्ना, सीधी, रीवा, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, बड़वानी एवं धार सहित विभिन्न प्रदेश के विविध स्थानों से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विद्वानों ने अपने शोध में कहा कि खजुराहो के मंदिर राजा भोज द्वारा किए गए गहन वास्तुशास्त्रीय अध्ययन की उत्कृष्ट परिणति हैं। उन्होंने बताया कि राजा भोज ने अपने ग्रंथों में भक्ति एवं रति को सूक्ष्म चेतना से जोड़ते हुए मानव जीवन के गहरे दार्शनिक पक्ष को प्रस्तुत किया है।
शोधकर्ताओं के अनुसार भोज की वास्तुकला बाह्य जगत से अंतर जगत की यात्रा का प्रतीक है, जिसमें सौंदर्य के साथ-साथ जीवन के सत्य का भी सजीव चित्रण मिलता है। नगर योजना, जल प्रबंधन, देवालय निर्माण एवं शिल्पकला के क्षेत्र में राजा भोज द्वारा दिए गए सिद्धांत आज भी मार्गदर्शक हैं। शोध संगोष्ठी का संचालन डॉ. केसर सिंह चौहान ने किया।









