
धार नगर की ऐतिहासिक जल संरचनाओं—तालाबों, बावड़ियों और कुओं—की समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए जिला उप पुलिस अधीक्षक आनंद तिवारी द्वारा लिखी गई शोध पुस्तक “धार नगर की प्राचीन जल संरचनाएं” का विमोचन शुक्रवार को रक्षित समागृह में गरिमामय समारोह के साथ किया गया।

पुस्तक में धार के साढ़े बारह तालाबों और बावड़ियों का ऐतिहासिक विवरण, उनके पास स्थित धार्मिक स्थल, प्राकृतिक परिवेश और जल संरचनाओं का सामाजिक व सांस्कृतिक महत्वविस्तार से प्रस्तुत किया गया है। इसी के साथ पुस्तक में वेदों में वर्णित 101 पर्यायवाची शब्दों का संग्रह भी शामिल किया गया है।

जो पाठकों को ऐतिहासिक ज्ञान के साथ-साथ संस्कृत और वैदिक साहित्य की समृद्धि से परिचित कराता है।विमोचन समारोह में उप पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने पुस्तक का लोकार्पण किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर, पारुल बेलापुरकर,धनंजय शाह, अमृत मीणा और शेरसिंह भूरिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इंदौर संभाग के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन रक्षित निरीक्षक धार पुरुषोत्तम विश्नोई ने किया। अतिथियों ने पुस्तक को धार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसकी सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल नगर की जल व्यवस्थाओं को समझने में सहायक है, बल्कि विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए भी ज्ञान का अमूल्य स्रोत है। इस शोध पुस्तक का उद्देश्य धार नगर की जल संरचनाओं की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक को उजागर करना है, और आने वाली पीढ़ियों को उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। साथ ही, वेदों के 101 पर्यायवाची शब्द इसे शैक्षिक दृष्टि से और भी समृद्ध बनाते हैं।










