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नेशन बुलेटिन धार। चायनीज़ माँझा नहीं, यह ख़ामोश हत्यारा है – डॉ.संदीप शर्मा

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धार । अगले 2-3 दिन सबसे बड़ा खतरा हर साल पतंगों के साथ कई घरों की रौनक कट जाती है। किसी माँ की गोद सूनी हो जाती है, किसी पिता की दुनिया उजड़ जाती है, किसी बच्चे की साँसें हवा में अटक जाती हैं।
यह सिर्फ़ एक हादसा नहीं—
यह हमारी लापरवाही, लालच और चुप्पी का मिलाजुला परिणाम है।
उड़ाने वाले रोमांच के नशे में भूल जाते हैं। कि यह माँझा किसी की गर्दन नहीं, पूरी ज़िंदगी काट देता है।
🙏जिनकी जान गई—
उनके नाम पर दो मिनट का मौन नहीं या केंडल मार्च नहीं हमारी आदतों में बदलाव चाहिए।
अब भी वक़्त है—
चायनीज़ माँझे को पूरी तरह नकारें, सुरक्षित पतंगबाज़ी अपनाएँ, और एक भी और मौत होने से रोकें। एक पतंग की जीत, किसी इंसान की जिंदगी की हार नहीं बननी चाहिए।
🔴 सामूहिक ज़िम्मेदारी —
बेचने वाले,उड़ाने वाला, माता-पिता और प्रशासन— चारों की जुम्मेदारी है
बेचने वाले की ज़िम्मेदारी:
प्रतिबंधित चायनीज़ माँझा न बेचे। मुनाफ़े के लिए किसी की जान से खिलवाड़ न करे।

उड़ाने वाले की ज़िम्मेदारी:
जानलेवे माँझे का उपयोग न करे। सड़क, राहगीरों, पक्षियों और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखे।

माता-पिता की ज़िम्मेदारी:
बच्चों को खतरनाक माँझे से दूर रखें। उन्हें जिम्मेदारी और संवेदनशीलता सिखाएँ।

प्रशासन की ज़िम्मेदारी:
प्रतिबंध को सख़्ती से लागू करे। अवैध बिक्री पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करे।
🕊️ एक पतंग की खुशी, किसी की ज़िंदगी से बड़ी नहीं।
चुप्पी भी अपराध है, रोकना हम सबका कर्तव्य है।

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