दस दिनों का होगा शारदीय नवरात्र, हाथी पर मां का आगमन, नवरात्र के दिनों में वृद्धि को माना जा रहा शुभ ।
इस नवरात्र में सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा, क्योंकि यह भारत में दृश्य नहीं ।
धार – इस बार शारदीय नवरात्र दस दिनों का होगी जो 22 सितंबर से आरम्भ होकर 2 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ समाप्त होगी । इस संदर्भ में मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिष गुरु डॉ. अशोक शास्त्री के अनुसार माता का आगमन हाथी पर होगा जो सुख-सौभाग्य का प्रतीक है और प्रस्थान मनुष्य की सवारी पर होगा। चतुर्थी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र दस दिनों की होगी । डॉ. अशोक शास्त्री के मुताबिक़ यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, किसी भी ग्रहण का प्रभाव तभी मान्य होता है जब वह उस क्षेत्र दिखाई दे । चूँकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा । इसलिए इसका यहाँ के धार्मिक कार्यों, पूजा पाठ या त्योंहारों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा । इसलिए इस सूर्य ग्रहण को लेकर बिल्कुल भी चिंतित न हों । आप पूरी श्रद्धा और उत्साह से नवरात्रि के सभी अनुष्ठान निःसंकोच करे ।
डॉ. अशोक शास्त्री का कहना है कि ज्योतिषीय दृष्टि से नवरात्र के दिनों में वृद्धि को शुभ माना जाता है। इससे पहले द्वितीया तिथि की वृद्धि के कारण 2016 में शारदीय नवरात्र दस दिनों की थी ।
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 29 सितंबर की सायं 4:31 बजे से लगेगी। इसलिए महाष्टमी 30 सितंबर को होगी। एक अक्टूबर का महानवमी का व्रत किया जाएगा। केवल प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत करने वाले व्रती एक अक्टूबर को व्रत का पारण करेंगे, जबकि पूरे नौ दिनों का अनुष्ठान करने वाले विजयदशमी के दिन दो अक्टूबर को व्रत का पारण करेंगे। एक अक्टूबर को महानवमी का व्रत होगा। उसी दिन कन्या पूजन, अपराजिता, शमी पूजन तथा हवन के साथ अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी। विजयदशमी दो अक्टूबर को मनाई जाएगी।
चतुर्थी की वृद्धि के चलते हो रही दिस दिनी नवरात्र
डॉ. शास्त्री बताते हैं कि इस बार चतुर्थी तिथि की वृद्धि है। तिथि के दो दिन पड़ने के कारण इस बार नवरात्र दस दिनों का होगा। चतुर्थी तिथि 25 सितंबर व 26 सितंबर को भी रहेगी। 26 सितंबर को सूर्योदय के पश्चात प्रात: काल 6:48 बजे तक चतुर्थी होने के कारण उदयातिथि में 26 को भी चतुर्थी का मान होगा। पंचमी तिथि अगले दिन 27 सितंबर को 8:46 बजे रहेगी, अतएव उदयातिथि में पंचमी 27 सितंबर को ही मिलने के कारण पंचमी का 27 सितंबर को होगा।
28 सितंबर रविवार को सरस्वती पूजा 29 सितंबर सोमवार को सायंकाल किया जाएगा। इसी दिन रात्रि में निशा पूजन संपन्न होगी। महाष्टमी एवं महानवमी का व्रत एक ही साथ 30 सितंबर मंगलवार को होगा। दुर्गापाठ का पूजन एवं हवन एक अक्टूबर, बुधवार को दोपहर 2:37 बजे तक होगा। पूर्ण नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग पारणा दो अक्टूबर गुरुवार को करेंगे तथा भगवती की प्रतिमा का विसर्जन भी दो अक्टूबर गुरुवार को प्रात:काल 6:18 बजे के बाद ही होगा।
एक अक्टूबर को दोपहर 2:37 बजे तक हवन, अगले दिन प्रात: विसर्जन
डॉ. अशोक शास्त्री ने बताया कि मूल नक्षत्र में मां का आह्वान किया जाता है, श्रवण नक्षत्र में विसर्जन होता है। इस बार महानवमी का व्रत करने के उपरांत नौ दिवसीय व्रत करने वाले साधक एक अक्टूबर को यावेत् नवमी के सिद्धांत के चलते दोपहर 2:37 बजे तक पूर्णाहुति हवन कर लेंगे। अगले दिन दो अक्टूबर को प्रात:काल 6:18 बजे के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा सकेगा ।
हाथी पर मां का आगमन देगा सुख-सौभाग्य
डॉ. अशोक शास्त्री बताते हैं कि इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी, जो शुभ संकेत है। इसे अच्छी वर्षा और कृषि में वृद्धि का सूचक माना जाता है। दूध का उत्पादन बढ़ता है, साथ ही देश में धन धान्य की बढ़ोतरी होती है। माता का प्रस्थान मनुष्य की सवारी पर होगा।









