भोपाल में नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश में खाद संकट और किसानों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया। प्रेस वार्ता में नेता प्रतिपक्ष ने केंद्र सरकार के आँकड़े, मासिक बुलेटिन पेश कर यह स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं थी, फिर भी किसानों को लंबी कतारों और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा।
किसानों पर लाठीचार्ज:
भिंड: “व्रहत्कार सहकारी संस्था” में खाद वितरण को लेकर लंबी कतार में खड़े किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
रीवा: “करहिया मंडी” में खाद के लिए कतार में खड़े किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
तीन सालों में मध्यप्रदेश में 16.25 LMT Urea और 7.11 LMT DAP बची रही।
मई–जून 2025 के मासिक बुलेटिन के अनुसार भी राज्य में DAP और Urea की उपलब्धता खपत से अधिक रही।
समस्या खाद की कमी नहीं, बल्कि वितरण और मैनेजमेंट की नाकामी थी।
कृषि और अर्थव्यवस्था:
उमंग सिंघार ने बताया कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, जिसमें योगदान 45% से अधिक है।
खाद की मांग और खपत के मामले में राज्य पूरे देश में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद, किसानों तक पर्याप्त खाद नहीं पहुँची।
4. केंद्र और भाजपा नेतृत्व पर सवाल-
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ₹1.50 लाख करोड़ से अधिक के वार्षिक बजट और मंत्रालय की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के पास होने के बावजूद, किसानों तक खाद न पहुँचना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी साबित करता है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार:
“मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और जे.पी. नड्डा — तीनों मिलकर भी किसानों की समस्या हल नहीं कर पा रहे, या फिर इन्हीं के बीच तालमेल की भारी कमी है।”
प्रदेश सरकार की नाकामी
माँग निर्धारण में लापरवाही: खरीफ–रबी सीजन का कोई वैज्ञानिक आकलन नहीं। ज़िला और ब्लॉक स्तर से वास्तविक आवश्यकता नहीं जुटाई गई।
ज़ोनल कॉन्फ्रेंस में केंद्र के सामने क्या माँगा गया — जनता से छुपाया गया।
तीन विभाग, एक जिम्मेदारी — फिर भी असफलता:
1 कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, खाद वितरण की निगरानी
2 सहकारिता विभाग, खाद की खरीद, भंडारण और वितरण
3 म.प्र. एग्रो इंडस्ट्रीज़ डवलपमेंट कॉरपोरेशन, खाद की खरीद और वितरण इन विभागों के बीच तालमेल की कमी और जवाबदेही के अभाव ने किसानों को संकट में डाला।
कालाबाज़ारी पर कार्रवाई नहीं:
खाद ‘Essential Commodities Act, 1955’ और ‘Fertilizer Control Order, 1985’ के तहत पूरी तरह नियंत्रित है।
राज्य सरकार के पास कालाबाज़ारी रोकने का पूरा अधिकार मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और इसका कोई रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
“आज लाठी चल रही है किसानों पर, दिक्कत खाद की कमी में नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की प्लानिंग और मैनेजमेंट की नाकामी में है।”









