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नेशन बुलेटिन धार। दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व पर्युषण प्रारंभ।

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*दिगंबर जैन समाज के पर्यूषण का प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म*

*दिगंबर जैन समाज के दशलक्षण महापर्व पर्युषण प्रारंभ*
धार दिगम्बर जैन समाज धार में परम पूज्य उपाध्याय 108 श्री विभंजन सागर जी मुनि राज ससंघ के पावन सानिध्य में धार नगर में प्रथम बार पर्युषण पर्व की आराधना समवशरण महा मंडल की रचना कर की जा रही है इस आयोजन हेतु पर्युषण महापर्व के पूर्व भव्य घटयात्रा श्री जी की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए संत सदन पहुंची…जहां पर्युषण महापर्व पर होने वाले समवशरण मंडल विधान के मुख्य पात्र चक्रवर्ती बन कर आराधना करने का शोभाग्य राजेंद्र जी लक्ष्मीजी मनीष जी आशीष जी पलाश जी बांझल परिवार को मिला एवं 26 प्रमुख इंद्र इंद्राणी बने! मंडल विधान पर मुख्य कलश विराजमान करने का सौभाग्य श्रीमती चंदा जी डॉक्टर अनिल जी कविता जी आंशिक गंगवाल परिवार को मिला सर्व प्रथम मंडल विधान की शुद्धि श्रीमती मीना गंगवाल ममता गंगवाल प्रेरणा कासलीवाल अभिलाषा गोधा केसरबाई जैन द्वारा की गई तत्पश्चात समवशरण मंडल का अनावरण डॉ पवन कुमार जैन द्वारा की गई समाज सदस्यों के द्वारा अन्य चार कलश एवं छत्र चवर लगाकर मां जिनवाणी जी को विराजमान किया गया.. श्रीजी के अभिषेक शांतिधारा पश्चात श्रीजी को समवशरण पर विराजमान किया गया पात्र चयन कार्यक्रम में गुरुदेव के सानिध्य के साथ इंदौर से पधारे प्रसिद्ध प्रतिष्ठाचार्य विधानाचार्य पंडित श्री भरत जी शास्त्री सहयोगी धार के विद्वान पंडित श्री विमल जी शास्त्री के कुशल मार्गदर्शन एवं संघस्थ प्रगति दीदी कमला दीदी का सहयोग निर्देशन प्राप्त हुआ! मीडिया पर आई संजय गंगवाल ने बताया कि आज अन्य पात्रों के चयन में लाभार्थी सोधर्म इंद्र नरेश जी मीना जी गंगवाल महायज्ञ नायक श्री रुपेश जीवैशाली जी बडजात्या यज्ञ नायक नवीन जी अभिलाषा जी गोधा कुबेर इंद्र जिनेंद्र जी निर्मल जी काला ईशान इंद्र पारस जी रुचि जी गंगवाल.सानत कुमार इंद्र निकुंज की खुशबू जी रावका महेंद्र इंद्र. सत्येंद्र जी मोना जी जैन ब्रम्ह इंद्र संजय जी अर्चना जी छाबड़ा ब्रह्मोत्तर इंद्र राकेश जी आशा जी जयपुर महामंडलेश्वर.नरेंद्र जी विजय जी कासलीवाल जयपुरमंडलेश्वर.
नरेंद्र जी अनीता जी काला इंद्र बन कर तथा बाक़ी श्रद्धालुजन सामान्य इंद्र इंद्राणी बन मंडल विधान पर पूजन आराधना कर रहे है कार्यक्रम के ध्वजारोहण.कर्ता प्रवीण जी प्रांजल जी बडजात्या रहे! मुनिश्री की दिव्य देशना उत्तम क्षमा धर्म पर हुई! गुरुदेव ने कहा कि क्रोध पर काबू करना सीखना चाहिए! क्षमा का भाव हमारे हृदय में होना चाहिए क्रोध में हमसे ऐसी गलतियां हो जाती है जिससे हम अपने स्वयं का नुकसान कर लेते है ! छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान ना देकर हम अपने क्रोध पर नियंत्रण कर सकते हैं!मन में क्षमा का भाव रखें!जैन धर्म में क्षमा का बहुत महत्व है!इस भव्य कार्यक्रम पर अध्यक्ष श्रेणिक गंगवाल ने हर्ष व्यक्त करते हुए सभी लाभार्थी परिवार को बधाई दी सचिव संजय छाबड़ा ने आभार प्रदर्शन किया!

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