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धार। मध्यप्रदेश विधानसभा – अनुपूरक बजट पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का तीखा प्रहार।

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*मध्यप्रदेश विधानसभा – अनुपूरक बजट पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का तीखा प्रहार*

*मुख्यमंत्री के पास विदेश यात्राओं के लिए बजट है, लेकिन जनता की समस्याएं सुनने के लिए न समय है न इच्छाशक्ति: उमंग सिंघार*

मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पर चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पास विदेश यात्राओं के लिए बजट है, लेकिन जनता की समस्याएं सुनने के लिए न समय है न इच्छाशक्ति। *श्री सिंघार ने कहा कि* हर बार विधानसभा सत्र की अवधि जानबूझकर छोटी रखी जाती है ताकि जनहित के मुद्दों से भागा जा सके। सरकार करोड़ों रुपये सत्र बुलाने पर खर्च करती है, लेकिन फिर भी जनता की आवाज़ को दबा देती है।

उन्होंने कहा कि यह अनुपूरक बजट वास्तव में *”कर्ज का खाका” है।* सरकार मार्च 2025 से लेकर जुलाई तक लगातार कर्ज ले रही है। दूसरी ओर, हर दिन डेढ़ करोड़ रुपये सिर्फ ब्रांडिंग पर खर्च किए जा रहे हैं। सालाना 560 करोड़ रुपये प्रचार में खर्च हो रहे हैं लेकिन कुपोषण, किसानों और गरीबों के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।

*मुख्य बिंदु जो नेता प्रतिपक्ष ने उठाए:*

*• किसानों को खाद और बिजली* नहीं मिल रही, सोशल ऑडिट नहीं हो रहा, जिससे जनता की वास्तविक समस्याएं सामने नहीं आ पा रहीं।
*• स्मार्ट मीटर* की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि 200 रुपये का बिजली बिल, 2000 रुपये तक आ रहा है।
*• आदिवासी अधिकारों की उपेक्षा:* सरकार सिर्फ 3.5% बजट ही अनुसूचित जनजाति विभाग को दे रही है, आदिवासियों को पट्टे देने में भी टालमटोल कर रही है। गूगल इमेजरी जैसे आधुनिक तरीकों से आदिवासियों की ज़मीन पर दावे की पुष्टि हो सकती है, लेकिन सरकार ऐसा नहीं करा रही।
*• शराब दुकानों पर एमआरपी* से अधिक दर पर बिक्री हो रही है। सिंघार ने पूछा – क्या सरकार की इसमें कोई भागीदारी है? हजारों शिकायत आईं लेकिन कोई कार्यवाही नही हो रहीं। ये पैसा किसकी जेब में जा रहा है ?
*• विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन और भत्ते* पर चिंता जताते हुए सिंघार ने कहा कि वर्तमान वेतन में कई विधायकों का गुजारा मुश्किल है। ये पक्ष विपक्ष की बात नहीं है। विधायक निधि भी कम से कम 5 करोड़ होनी चाहिए।
*• एमएसएमई नीति में भेदभाव:* बड़े उद्योगों को 1 रुपये में ज़मीन, जबकि छोटे उद्यमियों को लाखों में जमीन दी जा रही है। ऐसे में छोटे उद्योग कहां लगेंगे। सभी योजनाओं में करप्शन भरा पड़ा है।
*• आयुष्मान योजना पर सवाल:* 1.3 लाख से अधिक कार्डधारकों ने प्रदेश के बाहर इलाज कराया – क्या प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का इतना बुरा हाल है? अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं सुविधाएं नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री इसका जवाब कब देंगे ?

*नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि* सभी सरकारी योजनाओं का सोशल ऑडिट अनिवार्य किया जाए ताकि भ्रष्टाचार उजागर हो सके और पारदर्शिता लाई जा सके।

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